Monthly Archives: September 2015

सत्ता प्रलोभनों में फंसा पत्रकार

आज पत्रकार जगत में यह बहस छिड़ी है कि पत्रकारिता और उसके मरजीवड़े सामाजिक सरोकारों के मिशनरी न हो उससे विमुख हो गए हैं। आज वे लोकतंत्र का पहरुआ चौथा खम्बा न रहकर  उसका शोषण और  विकृत कर रहे तंत्र … Continue reading

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