कांग्रेस : जहाँ होंठो पे सच्चाई रहती है , से मचा कोहराम

  1. देहरादून (यु आई एस )उत्तराखंड कांग्रेस के प्रवक्ता धीरेन्द्र प्रताप से त्याग-पात्र लिए जाने की खबर है ,सम्भावना  है कि कड़वा सच बोलने के फलस्वरूप उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रभारी चौधरी वीरेंदर सिंह को भी पार्टी में उपेक्षा का दंश झेलना होगा                                                       इधर एक लम्बे समय से पार्टी के भीतर नेताओं की जुबान पर नियंत्रण के असफल प्रयास होते रहे है ,हालात की सच्चाइया है कि तमाम बन्धनों को तोड़ दिए जा रहे  बयान मीडिया की सुर्खी बन नेताओ के लिए मुसीबतें बढ़ा रहे है .धीरेन्द्र प्रताप ने नई दिल्ली जंतर-मंतर पर प्रदेश की कांग्रेस सरकार को बर्खास्त करने की मांग को लेकर चल रहे धरना-प्रदर्शन में भाग लेकर मांग के समर्थन में भाषण दे डाला।  सच तो यही है कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा .प्रदेश की जनता भी तो पिछले दो महा से यही कह रही है. किन्तु वह यह भूल  गए कि उस वक़्त वे प्रदेश कांग्रेस और पार्टी अध्यक्ष के प्रवक्ता भी थे .प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री और अनुशासन समिति के सदस्य सचिव रहते उन्होंने बिना कारन जांचे किसी के हित लाभ के लिए अनेको को पार्टी से बहार का रास्ता दिखने की असफल कोशिशे की, आखिकार शिकारी खुद शिकार हो गया . सत्ता के खेल में सच की यही नियति है .यहाँ सच स्वीकारना और बोलना आपके ज़मीर पर आश्रित नहीं होता .                                                              कांग्रेस में  ऐसा करने वाले वह अकेले व्यक्ति नहीं है ,समय -समय पर अनेक नेताओं ने सच बोला और सत्ता के नेपथ्य में खो गए . उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के पूर्व प्रभारी चौधरी वीरेंदर सिंह ने भी जींद (हरियाणा ) की एक सभा में भारतीय राजनीति के हो रहे कुरूप चेहरे पर से पर्दा उठाने की गलती कर दी है ,उन्होंने राज्य सभा सीट की चल रही कीमत सौ करोड़ रूपए जनता को बता दी .पार्टियों में पद ,लोक सभा और विधान सभा के टिकट पाने का खर्च मांगा जाता है ,यह बात बिहार कांग्रेस  के कार्यकर्ताओं ने, पार्टी नेत्री मार्गरेट आलव ने और धीरेन्द्र प्रताप ने भी मीडिया में बयां दे कर स्वीकारी है .उत्तराखंड ,हिमाचल और दिल्ली कांग्रेस के प्रभारी रहते उन्होंने किस सीट और पद के लिए किस से कितना मांगा या पाया ,यह भी वह जनता को बता दे तो लोकतंत्र  से गंदगी दूर करने में मदद मिलेगी .                                               चौधरी वीरेंदर अपने बयान से पलट रहे हैं किन्तु उनके प्रतिद्वंदी श्री हुड्डा हैं कि पीछा छोड़ने को तैयार नहीं हैं .खबर है कि उन्हें अखिल भारतीय किसान कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाये जाने का प्रस्ताव अब रद्द हो गया है .  गलती इन में से किसी नेता की नहीं है ,यह दोष तो इस देश की माटी का है ,जिस देश में गंगा बहती है ,हम उस देश के वासी है ,जहाँ होठों पे सच्चाई रहती है जो वक़्त -बे वक़्त जुबा पे आ बयान बन कोहराम मच जाती है .  –सुरेन्द्र सिंह आर्य ।-01/08/13

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